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अजमेर। देशभर में मुस्लिम समुदाय ने हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत की याद में मुहर्रम का अशूरा गम और अकीदत के साथ मनाया। वहीं ख्वाजा गरीब नवाज की नगरी अजमेर में 800–900 साल पुरानी ऐतिहासिक परंपरा ‘हाईदौस’ ने एक बार फिर कर्बला की जंग का जीवंत दृश्य प्रस्तुत किया। अजमेर के अंदरकोट क्षेत्र में दी पंचायत अन्दरकोटियान के नेतृत्व में डोले शरीफ के जुलूस के दौरान सैकड़ों लोगों ने नंगी तलवारों से हाईदौस खेलकर हजरत इमाम हुसैन के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा और अकीदत पेश की। इस परंपरा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि समूचे एशिया में तलवारों से खेले जाने वाले हाईदौस की परंपरा केवल दो स्थानों पर ही निभाई जाती है- एक अजमेर और दूसरा पाकिस्तान के हैदराबाद शहर में। माना जाता है कि यह परंपरा करीब 800 से 900 वर्षों से अजमेर में लगातार निभाई जा रही है और आज भी पूरे उत्साह, अनुशासन और धार्मिक आस्था के साथ जारी है। इस अनूठी परंपरा में अजमेर पुलिस प्रशासन स्वयं करीब 100 तलवारें उपलब्ध करवाता है। जिनसे हाईदौस खेला जाता है। इस दौरान कई प्रतिभागी तलवारों की चोट से घायल भी हो जाते हैं।

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