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अजमेर 28 मार्च। पूज्य दाजी ने शनिवार को मेडिकल कॉलेज के डॉ. भीमराव अंबेडकर सभागार आयोजित प्रातः कालीन सामूहिक ध्यान सत्र में आत्मिक शुद्धिकरण को आध्यात्मिक उन्नति के लिए आवश्यक बताया। 

हार्टफुलनेस संस्थान के वैश्विक मार्गदर्शक कमलेश डी पटेल पूज्य दाजी के निर्देशन में हृदय आधारित ध्यान सत्र का आयोजन किया गया। इस ध्यान सत्र का आयोजन जेएलएन मेडिकल कॉलेज के डॉ. भीमराव अंबेडकर सभागार में किया गया था। इसमें पूज्य दाजी ने अभ्यासियों को सामूहिक ध्यान कराया। इससे पूर्व रिलैक्सेशन के माध्यम से तनाव मुक्ति के सूत्र दिए गए। 

पूज्य दाजी के अनुसार आत्मिक शुद्धिकरण के माध्यम से आध्यात्मिक उन्नति तीव्र गति से होती है। इसके लिए हार्टफूलनेस की हृदय आधारित पद्धति में सायंकालीन सफाई का प्रावधान किया गया है। इससे व्यक्ति अपनी आत्मा पर बनी हुई छापों को साफ कर सकता है। इससे नए संस्कार बनने बंद हो जाते हैं तथा पुराने संस्कारों का शमन हो जाता है। यह विचारों के नकारात्मकता को नष्ट करने में सहायक होता है।

इसी प्रकार हार्टफूलनेस ध्यान पद्धति में प्रातः कालीन ध्यान किया जाता है। ध्यान के दौरान यह विचार किया जाता है कि दिव्य ईश्वरीय प्रकाश पहले से ही हृदय में विद्यमान है यह मुझे आकर्षित कर रहा है। इस विचार के साथ बैठने से ध्यान की गहराई प्राप्त होती है। साथ ही प्राणाहुति की यौगिक शक्ति व्यक्ति को ईश्वर से सीधे जुड़ने में सहयोग प्रदान करती है। यह ध्यान हमारे में सकारात्मक विचारों की वृद्धि करता है।

हार्टफूलनेस ध्यान पद्धति की यही विशेषता इसे विलक्षण बनाती है। नकारात्मक विचारों को खत्म करने के साथ ही सकारात्मक को बढ़ावा देना दोहरा लाभ प्रदान करता है। इस सहज एवं सरल जीवन पद्धति में हृदय को आंतरिक परिवर्तन का केंद्र माना गया है। हृदय पर दी गई प्राणाहुती की ऊर्जा से मानसिक, बौद्धिक एवं आत्मिक विकास तेजी से होता है।

हार्टफुलनेस ध्यान पद्धति पवित्र आत्माओं को अपने परिवार मैं जन्म लेने के लिए प्रेरित करने का साधन है। दिव्य जननी कार्यक्रम के अंतर्गत यह बात सुनिश्चित की जाती है कि अधिकतम पवित्र आत्माएं इस पृथ्वी पर जन्म लें। जन्म के पश्चात द विजडम ब्रिज के माध्यम से पेरेंटिंग भी सिखाई जाती है। वर्ष 7 से 15 की आयु के मध्य के बच्चों के लिए ब्राइटर माईन्ड के माध्यम से बच्चों की सुप्त प्रतिभाओं एवं योग्यताओं को निखारकर प्रकाशित किया जाता है। पन्द्रह वर्ष से ऊपर के व्यक्ति इस पद्धति से ध्यान कर अपनी आत्मा की आध्यात्मिक पहुंच को व्यापक बना सकते हैं। 

भगवान श्री कृष्ण ने गीता में कहा है कि मैं ही समय हूं। इसे केंद्र में रखते हुए हमें समय का सदुपयोग करना चाहिए। ऐसा नहीं कर हम ईश्वर को अपमानित कर रहे हैं। क्योंकि कृष्ण स्वयं ही समय है। भारतीय परंपरा में व्यक्ति को अंतिम समय ईश्वर की याद में रहने के लिए कहा गया है। इसके लिए व्यक्ति को अपनी अभिव्यक्ति ईश्वर के साथ जोड़नी होगी। यह एक दिन में नहीं होगा। सतत अभ्यास से इसे प्राप्त किया जा सकता है।

प्रातः कालीन ध्यान सत्र में संभागीय आयुक्त श्री शक्ति सिंह राठौड़, जिला कलक्टर श्री लोक बंधु, विशेषाधिकार विधानसभा एवं कार्यक्रम समन्वय श्री के.के. शर्मा, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के महानिरीक्षक एवं कमांडेंट उपस्थित रहे।

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