अजमेर। वर्ष का द्वितीय एवं अंतिम सूर्यग्रहण भाद्रपद/श्रावण अमावस्या पर 12 और 13 अगस्त की मध्य रात्रि को घटित होगा। यह एक पूर्ण सूर्यग्रहण होगा। भारतीय मानक समय के अनुसार ग्रहण का स्पर्श 12 अगस्त को रात्रि 9:04:03 बजे होगा, जबकि इसका मोक्ष 13 अगस्त को मध्य रात्रि 01:27:09 बजे होगा। इस खगोलीय घटना की कुल अवधि 4 घंटे 31 मिनट रहेगी।
खगोलीय विज्ञान के अनुसार, सूर्यग्रहण तब होता है जब चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के बीच एक सीधी रेखा में आ जाता है। दीर्घवृत्ताकार कक्षा में परिक्रमा करते हुए जब चंद्रमा पृथ्वी के निकटतम बिंदु पर होता है, तब वह सूर्य को पूरी तरह से ढक लेता है। इस ग्रहण के मध्य (परमग्रास) की स्थिति 12 अगस्त की मध्य रात्रि 11:15:09 बजे होगी, जब चंद्रमा सूर्य के 103.8 प्रतिशत भाग को आच्छादित कर लेगा। इसके प्रभाव से दृश्य क्षेत्रों में कुछ समय के लिए दिन में ही पूर्ण अंधकार जैसी स्थिति निर्मित हो जाएगी।
*भारत में रात्रि होने से नहीं दिखेगा नजारा:*
भारतीय समय अनुसार यह ग्रहण रात के समय घटित हो रहा है, इसलिए यह पूर्ण सूर्यग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। भारत में दृश्य न होने के कारण यहां इसका धार्मिक या सूतक काल संबंधी प्रभाव मान्य नहीं होगा। यह खगोलीय नजारा पश्चिमी यूरोप, पश्चिमी अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका, ग्रीनलैंड, उत्तरी अटलांटिक महासागर तथा उत्तरी प्रशांत महासागर के क्षेत्रों में स्पष्ट और आकर्षक रूप से देखा जा सकेगा।
*2027 में देखने मिलेगा बड़ा खगोलीय नजारा:*
खगोल विज्ञान के अनुसार 12 अगस्त 2027 को लगने वाला पूर्ण सूर्यग्रहण दुनिया के सबसे लंबे सूर्यग्रहणों में शामिल होगा। इसकी पूर्णता अवधि 6 मिनट 23 सेकंड रहेगी। भारत के कुछ हिस्सों से यह आंशिक रूप में दिखाई देगा, जबकि उस समय भारत में सूतक के नियम लागू होंगे।
*मंदिरों के पट भी नहीं होंगे बंद:*
पुजारी मनोज तिवारी ने बताया कि ग्रहण के कारण किसी प्रकार का सूतक या मंदिरों के पट बंद करने जैसी स्थिति नहीं बनेगी। हालांकि ज्योतिषीय दृष्टि से कुछ राशियों पर इसका सूक्ष्म प्रभाव माना जा सकता है, लेकिन धार्मिक अनुष्ठानों पर इसका असर नहीं होगा…!!