अजमेर, एक अगस्त। महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय का 39वां स्थापना दिवस के अवसर पर शनिवार को राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने मुख्य अतिथि के रूप में अपने उद्बोधन में कहा कि विद्यार्थियों को सभ्यता, नैतिकता एवं मानवता का पाठ पढ़ाना चाहिए।
राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने कहा कि महर्षि दयानन्द सरस्वती ने अशिक्षा को हटाकर वैदिक ज्ञान फैलाने की गुरूदक्षिणा दी थी। उनके द्वारा स्थापित आर्य समाज ने स्वतंत्रता की लड़ाई में महत्वपूर्ण योगदान देने के साथ-साथ भारत विभाजन के समय शरणार्थियों को भी सहयोग प्रदान किया था। उन्होंने समाज सुधार एवं समाज के संगठन के लिए विशेष कार्य किया। इसकी विश्वभर में पहचान है। इनके बताए आदर्शों को जीवन में अपनाना चाहिए।
राज्यपाल श्री बागडे ने कहा कि हमारे पाठ्यक्रम में सभ्यता, नैतिकता एवं मानवता के पाठ पढ़ाए जाने चाहिए। इससे विद्यार्थियों में ईमानदारी के गुण आएंगे। नई शिक्षा नीति में नैतिक शिक्षा को विशेष स्थान दिया गया है। लॉर्ड मैकाले ने भारत को गुलाम बनाए रखने के लिए अंग्रेजी शिक्षा पद्धति लागू की। इससे व्यक्ति अपनी जड़ों से दूर होने लगा। उस समय 8 लाख से अधिक गुरूकुल संचालित होते थे। उन्हें बंद किया गया। साथ ही प्रत्येक घर में घरेलू उद्योग होते थे, इन्हें भी नष्ट किया गया। कालीबाई भील ने शिक्षा के लिए बलिदान दिया।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की बौद्धिक क्षमता बढ़ाने से प्रतिभाशाली युवा तैयार होंगे। यह युवा भारतीय विश्व में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाएंगे। हाल ही में आयोजित नीट परीक्षा में संख्या के अनुसार राजस्थान दूसरे स्थान पर तथा परिणाम की दृष्टि से प्रथम स्थान पर रहा। उत्तरप्रदेश में 3.28 लाख विद्यार्थियों ने परीक्षा दी। इनमें से 1.70 लाख विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए, यह 51.93 प्रतिशत है। राजस्थान में 1.92 लाख विद्यार्थियों में से 1.33 लाख विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए, यह 69.34 प्रतिशत है।
उन्होंने कहा कि नकल रोकने के लिए सरकार ने नया कानून बनाया है। इसमें 10 करोड़ के जुर्माने के साथ-साथ कठोर सजा का प्रावधान किया गया है। इससे असामाजिक तत्व यह अपराध करने से डरेंगे। नकल मुक्त परीक्षा के लिए यह शुरूआत है। भविष्य में समस्त परीक्षाएं नकल मुक्त होगी। नशा मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत रविवार को शपथ दिलाई जाएगी।
इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी ने कहा कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा संभाग स्तर पर विश्वविद्यालय आरम्भ करने के लिए आंदोलन चलाया गया था इसके कारण महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष 1987 में हुई। इसके प्रथम कुलगुरू श्री पुरूषोत्तम चतुर्वेदी थे। डीएवी कॉलेज परिसर में इसकी शुरूआत हुई थी। वर्तमान में 464 महाविद्यालय इससे संबद्ध है। इसे बी++ नेट ग्रेड मिला है। अब नया योग विश्वविद्यालय भी अजमेर में बनने जा रहा है।
श्री देवनानी ने कहा कि श्री महर्षि दयानन्द सरस्वती ने 19वीं शताब्दी में विचार की ज्योति प्रज्वलित की थी। श्रद्धा विवेक के साथ तथा आस्था सत्य के साथ रखने का संदेश दिया। उन्होंने वेदों की ओर लौटने का कहकर ज्ञान के मूल स्त्रोत तक चलने का आह्वान किया। उनके दिखाए मार्ग के अनुसार सत्य के प्रति निष्ठा एवं नैतिक अनुशासन आज भी प्रासंगिक है।
उन्होंने कहा कि भारत के विश्वविद्यालय ज्ञान के मंदिर है। यहां विद्यार्थियों के लिए जीवन का उद्देश्य दृष्टि निर्माण का रखा जाता है। इनकी उपलब्धि यहां के विद्यार्थियोंं द्वारा प्राप्त किए गए लक्ष्य है। भारत सर्वाधिक युवा आबादी वाला देश है। यह युवा दर्शक के स्थान पर व्यवस्था परिवर्तन की चाह रखता है। इसलिए विश्वविद्यालयों को परिणाम देने वाला बनना होगा। विश्वविद्यालय परीक्षा लेने की जगह के स्थान पर अनुसंधान एवं नवाचार के केन्द्र बने। अपने ज्ञान का उपयोग मानवता के हित में करें।
उन्होंने कहा कि आधुनिकता के साथ-साथ जड़ों की पहचान, तकनीकी के साथ-साथ संस्कृति एवं वैश्विक के साथ-साथ भारतीयता को अपनाने से समावेशी पीढ़ी तैयार होगी। भारत ने शून्य, दशमलव, योग, दर्शन, आयुर्वेद एवं प्रेरणादायी जीवन दृष्टि समस्त विश्व को प्रदान की है। भारत के विश्वविद्यालयों का शैक्षिक वातावरण ऎसा होना चाहिए कि सभी देशों के विद्यार्थी यहां आकर अध्ययन करे। भारत आर्थिक के साथ-साथ ज्ञान की महाशक्ति भी बने।
जल संसाधन मंत्री श्री सुरेश सिंह रावत ने कहा कि महर्षि दयानन्द विश्वविद्यालय का छात्र होना गौरवशाली है। विधायक के रूप में विश्वविद्यालय की सेवा करना सौभाग्यशाली है। पुराने समय से अजमेर का विशेष महत्व रहा है। पुष्कर की अपनी पहचान है। यहां सम्पूर्ण भारत बसता है। उन्होंने विश्वविद्यालय में एल्यूमनी स्वागत कक्ष के लिए 50 लाख रूपए की राशि विधायक कोष से देने की घोषणा की।
कुलगुरू श्री सुरेश अग्रवाल ने कहा कि स्थापना दिवस समारोह से विश्वविद्यालय की दिशा दृष्टि तय होगी। यहां के छात्रों ने विभिन्न क्षेत्रों में नाम रोशन किया है। विश्वविद्यालय की शोध, उद्यमिता एवं सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ कार्य करने की योजना है। मूल्य आधारित पाठ्यक्रम को शीघ्र लागू किया जाएगा।
कुल सचिव श्री कैलाश चन्द्र शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि ज्ञान, सत्य, चरित्र, अनुसंधान एवं राष्ट्र सेवा के साथ विश्वविद्यालय नई ऊंचाईयों तक पहुंचेगा।
समारोह में नवोद्धार का लोकार्पण, शुभारम्भ एवं शिलान्यास किया गया। इनमें एकलव्य भवन, वाल्मिकी भवन, 11 केवी केन्द्र भवन, चारदिवारी, प्राणज्ञ भवन, महाराणा प्रताप भवन, विश्वकर्मा भवन, राजस्थानी भाषा अध्ययन केन्द्र, महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय पॉडकास्ट कक्ष, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कक्ष, विश्वविद्यालय का उत्तर प्रवेश द्वार शामिल है। इनके लिए 1.20 करोड़ से अधिक की राशि सीएसआर फंड से प्राप्त हुई थी। समारोह में विश्वविद्यालय की त्रैमासिक पत्रिका त्रिवेणी का विमोचन भी किया गया। साथ ही वैदिक हवन में पूर्णाहुति की गई। रक्तदान शिविर, स्वास्थ्य परीक्षण शिविर का अवलोकन किया। ईसीजी केन्द्र को उद्घाटन कर वृक्षारोपण किया गया।
इस अवसर पर प्रबंध मंडल के सदस्य शाहपुरा विधायक श्री लालाराम बैरवा, मसूदा विधायक श्री विरेन्द्र सिंह कानावत, अजमेर डेयरी के अध्यक्ष श्री रामचन्द्र चौधरी, जिला कलक्टर श्री लोक बन्धु एवं पुलिस अधीक्षक श्री हर्ष वर्धन अगरवाला सहित शिक्षाविद उपस्थित रहे।
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