अजमेर। अजमेर शहर में बंगाली समाज द्वारा कचहरी रोड स्थित बंगाली हिंदू धर्मशाला में 99वें दुर्गा पूजा महोत्सव और दुर्गा अष्टमी की तैयारियां पूरी भव्यता और उत्साह के साथ चल रही हैं। इस वर्ष बंगाली और राजस्थानी संस्कृति के इस सुंदर मेल को देखने के लिए पूरे शहर में भारी उत्साह है। बंगाली समाज द्वारा स्थापित की जा रही मां दुर्गा की भव्य प्रतिमाओं के लिए विशेष रूप से कोलकाता के सोनागाछी से मिट्टी लाई गई है। कोलकाता का प्रसिद्ध कुंडू परिवार पिछले ढाई महीनों से दिन-रात यहां काम कर रहा है। इस परिवार की तीसरी पीढ़ी अजमेर में मूर्तियां बनाने की परंपरा को आगे बढ़ा रही है।
मूर्तियों के निर्माण में किसी भी प्रकार के हानिकारक या केमिकल रंगों व वस्तुओं का उपयोग नहीं किया गया है। इन आकर्षक प्रतिमाओं को शुद्ध रूप से बांस, सूखी घास (पुआल), चावल के तिनके, सुतली, चिकनी मिट्टी और प्राकृतिक रंगों से तैयार किया गया है। यह पूरी तरह बायोडिग्रेडेबल हैं। जिससे विसर्जन के बाद ये प्राकृतिक रूप से मिट्टी में मिल जाएंगी। बंगाली समाज के इस पारंपरिक 6 दिवसीय कार्यक्रम में दुर्गा अष्टमी का दिन सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन पारंपरिक धुनाची नृत्य, संधि पूजा (108 दीयों के साथ) और महाआरती का भव्य आयोजन किया जाएगा। अष्टमी पर विशेष भोग और महाप्रसाद का वितरण किया जाएगा। इसके साथ ही बंगाली धर्मशाला में विभिन्न सांस्कृतिक और संगीत कार्यक्रमों का आयोजन भी शेड्यूल किया गया है।
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