अजमेर। अजमेर नगर निगम महापौर (मेयर) चुनाव में स्पष्ट बहुमत न मिलने के कारण कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दलों में राजनीतिक रस्साकशी और रणनीति बनाने का दौर तेज हो गया है। दोनों पार्टियां जादुई आंकड़े तक पहुंचने के लिए पूरा जोर लगा रही हैं क्योंकि किसी भी दल को अपने दम पर स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। नगर निगम के कुल 80 वार्डों के परिणाम घोषित हो चुके हैं। जिसमें बहुमत के लिए 41 पार्षदों का समर्थन जरूरी है। इस चुनाव में किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिलने के कारण सभी 11 निर्दलीय पार्षद सबसे महत्वपूर्ण भूमिका (किंगमेकर) में आ गए हैं। कांग्रेस का दावा है। कि उसके पास कुछ निर्दलीयों का समर्थन मिलाकर 40 से अधिक पार्षद हैं। जबकि भाजपा भी अपनी रणनीति के तहत निर्दलीयों को अपने पाले में लाने का दावा कर रही है। पार्षदों में क्रॉस-वोटिंग या टूट-फूट को रोकने के लिए दोनों दलों ने बाड़ेबंदी शुरू कर दी है। कांग्रेस ने अपने पार्षदों और कुछ निर्दलीयों को बेंगलुरु के रिजॉर्ट में सुरक्षित भेजा है। वहीं भाजपा खेमे ने भी अपने पार्षदों को एकजुट रखने के लिए जयपुर व अन्य स्थानों पर रणनीति बनाई है। मेयर पद के लिए कांग्रेस की तरफ से किरण गढ़वाल और भाजपा की ओर से अनामिका शर्मा मैदान में हैं। भाजपा द्वारा किरण गढ़वाल के नामांकन (निगम में बकाया राशि) पर जताई गई आपत्ति को निर्वाचन अधिकारी ने खारिज कर दिया है। जिससे अब दोनों के बीच सीधा मुकाबला तय हो चुका है। 21 सितंबर को नगर निगम के पार्षद मेयर चुनने के लिए मतदान करेंगे।