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अजमेर। जयपुर, 12 मई। राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान सोसायटी (एनआईएच), रूड़की की 43वीं वार्षिक बैठक मंगलवार को केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी.आर. पाटिल की अध्यक्षता में सोसायटी के जल विज्ञान भवन में आयोजित हुई। इस महत्वपूर्ण सभा में राजस्थान के जल संसाधन मंत्री श्री सुरेश सिंह रावत शामिल हुए।

 

जल संसाधन मंत्री श्री रावत ने अहम बैठक में कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘विकसित भारत-2047‘ विजन के अनुरूप राज्य सरकार प्रदेश को जल सुरक्षित राज्य बनाने की दिशा में तीव्र गति से कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान वाटर ग्रिड कॉर्पोरेशन की स्थापना कर 25 हजार करोड़ रुपए के कार्यादेश जारी किए जा चुके हैं। इन कार्यों से संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चम्बल (पीकेसी) लिंक परियोजना को प्रभावी रूप से धरातल पर उतारा जा रहा है। 

 

– जल परियोजनाओं में निरंतर सहयोग का आग्रह

 

श्री रावत ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न वृहद् परियोजनाओं पर कार्य कर रही है। यमुना जल समझौते के अंतर्गत शेखावाटी क्षेत्र में यमुना जल पहुंचाने और पश्चिमी राजस्थान में क्षेत्रों में जल अपवर्तन सम्बंधी विभिन्न कार्य प्रगतिरत हैं। 

 

श्री रावत ने कहा कि राजस्थान में जल विज्ञान आधारित अनुसंधान और तकनीकी समाधान की अत्यंत आवश्यकता है। उन्होंने केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री से आग्रह किया कि राजस्थान की वृहद् जल अपवर्तन एवं प्रबंधन परियोजनाओं में वैज्ञानिक संस्थानों, राज्य सरकारों एवं नीति-निर्माताओं का सतत सहयोग सुनिश्चित किया जाए। इससे प्रदेश की जल आत्मनिर्भरता को और अधिक मजबूती मिल सकेगी। 

 

– राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान की भूमिका सराहनीय

 

जल संसाधन मंत्री ने राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान की भूमिका के लिए सराहना की। उन्होंने कहा कि संस्थान ने राजस्थान को सदैव तकनीकी एवं वैज्ञानिक सहयोग प्रदान किया है। विशेष रूप से राष्ट्रीय हाइड्रोलॉजी परियोजना के अंतर्गत डेटा प्रबंधन, क्षमता निर्माण, प्रशिक्षण तथा विभिन्न तकनीकी अध्ययनों में संस्थान का सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है।

 

श्री रावत ने कहा कि एनआईएच ने देश में हाइड्रोलॉजी, जल संसाधन प्रबंधन, भू-जल संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, बाढ़ पूर्वानुमान तथा आधुनिक हाइड्रोलॉजिकल तकनीकों के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए हैं। यह संस्थान अब केवल अनुसंधान तक सीमित नहीं रहकर देश के जल क्षेत्र के लिए नीति, विज्ञान एवं तकनीकी समाधान उपलब्ध कराने वाला अग्रणी राष्ट्रीय केन्द्र बन चुका है।

 

बैठक में जल शक्ति राज्य मंत्री श्री राज भूषण चौधरी, अंडमान और निकोबार के उप राज्यपाल एडमिरल श्री डी.के जोशी, जल शक्ति मंत्रालय के सचिव श्री वी.एल. कांथा राव, आईआईटी रूड़की के निदेशक डॉ. के.के. पंत, एनआईएच के निदेशक डॉ. वाई.आर.एस. राव सहित सोसायटी के सदस्य, वैज्ञानिक एवं जल संसाधन क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

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