अजमेर। अजमेर नगर निगम चुनाव 2026 में कांग्रेस के सबसे बड़ी पार्टी (37 सीटें) होने के बावजूद मेयर चुनाव हारने और उनके खेमे में टूट होने के प्रमुख कारण भीतरघात (क्रॉस वोटिंग), स्थानीय गुटबाजी और कमजोर चुनावी मैनेजमेंट रहे हैं। 80 वार्डों वाले अजमेर नगर निगम में बहुमत के लिए 41 वोटों की जरूरत थी। कांग्रेस के पास अपने खुद के 37 पार्षद थे। लेकिन गुप्त मतदान के दौरान कांग्रेस के ही 3 पार्षदों ने क्रॉस वोटिंग की और अपना वोट भाजपा उम्मीदवार को दे दिया। अजमेर कांग्रेस में लंबे समय से आंतरिक खींचतान चल रही है। जो विशेष रूप से पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के समर्थकों (जैसे धर्मेंद्र राठौड़ और अन्य नेताओं के गुट) के बीच बंटी हुई है। चुनाव से ठीक पहले टिकट वितरण को लेकर भारी असंतोष था। कई स्थानीय कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने खुले तौर पर बाहरी प्रत्याशियों को टिकट देने का विरोध किया था। जिसके कारण अंदरूनी कलह और बढ़ गई। कांग्रेस पार्टी ने दावा किया था कि उन्हें 11 में से कई निर्दलीय पार्षदों का समर्थन हासिल है। लेकिन ऐन वक्त पर कांग्रेस अपने मैनेजमेंट के कारण इन निर्दलीयों को अपने पाले में नहीं रख सकी। इसके विपरीत, केवल 32 सीटें होने के बावजूद भाजपा रणनीति बनाकर 11 निर्दलीयों और कांग्रेस के बागियों को अपने साथ मिलाने में सफल रही, जिससे भाजपा की अनामिका शर्मा को 43 वोट मिले और वे मेयर बन गईं। कांग्रेस ने अपने पार्षदों को एकजुट रखने के लिए बेंगलुरु में बाड़ाबंदी भी की।