अजमेर 18 जनवरी। खरेखड़ी रोड़ पुष्कर स्थित साईदत्त विकास साईधाम में रविवार को मौनी अमावस्या के अवसर पर साई मंदिर का शुभारम्भ विधिवत पूजा अर्चना के साथ किया गया। साईदत्त विकास साईधाम के संस्थापक श्री विकास रूणवाल ने ट्रस्ट द्वारा करवाए विकास कार्यों से अवगत कराया। इसके साथ केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री भागीरथ चौधरी ने भी पूजा की।
राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे रविवार को साईदत्त विकास साई धाम पहुंचे। इसका निर्माण करवाने वाले चैरीटेबल ट्रस्ट के संस्थापक श्री विकास रूणवाल, केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री भागीरथ चौधरी, महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय के कुलगुरू प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल, संभागीय आयुक्त श्री शक्ति सिंह राठौड़, पुलिस महानिरीक्षक श्री राजेन्द्र सिंह, पुलिस अधीक्षक वंदिता राणा के द्वारा पूजा अर्चना की गई। राज्यपाल श्री बागड़े को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। वैदिक मंत्रोचारण के साथ पूजा अर्चना सम्पन्न हुई। पूर्ण विधि विधान के साथ सांई मंदिर गर्भगृह में पूूजा कर मंदिर का शुभारम्भ किया गया।
उन्होंने मुख्य मंदिर में पूजा करने के पश्चात परिसर स्थित अन्य मंदिरों में भी पूजा की। चावड़ी मंदिर तथा द्वारका माई श्री सांई बाबा पर पुष्पांजलि अर्पित की। इसके साथ-साथ नवग्रह मंदिर तथा 24 तीर्थंकर मंदिर को नमन किया। श्री गणेश, दुर्गा माता, लक्ष्मी माता, सरस्वती माता, विट्ठल रूक्मणी, राधाकृष्ण मंदिर में भी पूजा करने के पश्चात, 11 मुखी हनुमान मंदिर और शिव मंदिर में शीश नवाया।
श्री बागडे ने मीडियाकर्मियों के साथ वार्ता में कहा कि उपचारक श्री विकास रूणवाल के द्वारा पुष्कर क्षेत्र में सांई मंदिर के साथ अन्य देवी देवता मंदिरों की स्थापना से क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। पुष्कर में पूर्व के केन्द्रों के साथ यह भी नवीन पर्यटन केन्द्र विकसित होने से आगन्तुकों को आकर्षित करेगा। इससे क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों में वृद्वि होगी।
उन्होंने कहा कि परिसर में बड़ी संख्या में वृक्षारोपण किया गया है। इससे पर्यावरण संरक्षक का कार्य होगा। आगंतुकों को पर्यावरण और प्रकृति के बारे में प्रेरणा मिलेगी। वृक्षारोपण से वर्षा की मात्रा बढ़ेगी। इससे किसानों को लाभ होगा। इसका प्रभाव देश के उत्पादन तथा आर्थिक तंत्र पर सकारात्मक रूप से पडे़गा। साथ ही श्री रूणवाल द्वारा व्यक्तियों की शारीरिक, मानसिक, आर्थिक, आपसी सम्बन्धों सहित विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए अभिमंत्रित जल, बाम और तेल देकर आमजन का समाधान किया जाएगा।
संस्थापक श्री विकास रूणवाल ने बताया कि साई मंदिर के लिए काला पत्थर महाराष्ट्र से लाया गया है। मुख्य शिरडी मंदिर के समान तथा बराबर आकार की मूर्ति यहां स्थापित है। यहां नवग्रह वाटिका, राशि नवग्रह वाटिका, पंचवटी वाटिका, 24 तीर्थंकर वाटिका, 16 योग माता मंदिर, शनि शिंगणापुुर मंदिर, शिव परिवार, विठ्ठल रूक्मणी, राधाकृष्ण, रूद्रावतार सहित 61 मंदिर विद्यमान है। कुल 22 बीघा में विस्तारित परिसर में 5 हजार वर्ग फीट की योग वाटिका भी है। प्रत्येक मंदिर एक पेड़ प्रजाति से जुड़ा हुआ है। पर्यावरण सरंक्षण के लिए रिसाईकल जल का उपयोग किया जाता है। बूंद-बूंद पद्धति अपनाई गई है। वन्य जीवों के लिए चारों और एनीकट बनाकर हमेशा जल उपलब्ध कराया जाता है।
इस अवसर पर उपखण्ड अधिकारी श्री नरेन्द्र कुमार मीणा एवं श्री चन्द्रशेखर भण्डारी, उपखण्ड अधिकारी श्री गुरूप्रसाद तंवर, निर्वतमान अध्यक्ष श्री कमल पाठक सहित गणमान्य नागरिक एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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